Friday, September 6, 2024

अपने ग़म को तुमसे छुपा के रखती हूँ

बस ऐसे ही तुमसे मैं प्यार करती हूँ

अपने ग़म को
तुमसे छुपा के रखती हूँ,
इसलिए
ख़ुद को इतना सजा के रखती हूँ।

तुमसे जो हूँ,
तो मेरे आँसू भी तुम्हारे हो जाते —
इसलिए
हर घड़ी
ख़ुद से ही
तुमको बचा के रखती हूँ।

मोहब्बत को
रौंदने की कोशिशें हज़ार होंगी,
तुमसे
मुझे छुड़ाने को
बंदिशें बेहिसाब होंगी।

इसलिए
छुप-छुप के मुलाकात करती हूँ —
कभी निगाहों से,
कभी ख़्वाबों में,
कभी किसी ख़ामोश दुआ के बहाने।

मैं जानती हूँ —
ये रास्ता आसान नहीं,
पर ये भी जानती हूँ —
तुम हो, तो सब मुमकिन है।

इसलिए
ना शोर मचाया,
ना कोई वादा माँगा,
बस
ऐसे ही, चुपचाप,
तुमसे प्यार करती हूँ।

No comments:

Post a Comment

मैं चुपके से तुझे अपना बना के रखती हूँ

 छुपा के ग़म मैं खुद को यूँ सजा के रखती हूँ  बस इस तरह से तुझसे दिल लगा के रखती हूँ तुझे न छू सके ये अश्क, ये दुनिया की रुस्वाई  तभी तो खुद ...