बस ऐसे ही तुमसे मैं प्यार करती हूँ
अपने ग़म को
तुमसे छुपा के रखती हूँ,
इसलिए
ख़ुद को इतना सजा के रखती हूँ।
तुमसे जो हूँ,
तो मेरे आँसू भी तुम्हारे हो जाते —
इसलिए
हर घड़ी
ख़ुद से ही
तुमको बचा के रखती हूँ।
मोहब्बत को
रौंदने की कोशिशें हज़ार होंगी,
तुमसे
मुझे छुड़ाने को
बंदिशें बेहिसाब होंगी।
इसलिए
छुप-छुप के मुलाकात करती हूँ —
कभी निगाहों से,
कभी ख़्वाबों में,
कभी किसी ख़ामोश दुआ के बहाने।
मैं जानती हूँ —
ये रास्ता आसान नहीं,
पर ये भी जानती हूँ —
तुम हो, तो सब मुमकिन है।
इसलिए
ना शोर मचाया,
ना कोई वादा माँगा,
बस
ऐसे ही, चुपचाप,
तुमसे प्यार करती हूँ।
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