Thursday, June 19, 2025

यही मेरी ताकत है

कहने को बहुत कुछ है ! 
पर कैसे कहूं ? 
पता नही तुम समझ पाओगे या नही, 
जो मैं महसूस करती हूँ । 
दूरियों का एहसास मुझे डराता है, 
धमकाता है 
और तोड़ने का प्रयास करता है, 
पर मुझे मंजूर नही है,
 यूँ टूट जाना 
और टूटकर बिखर जाना । 
जानती हूँ 
अभी तुम्हारे पास वक़्त नही है, 
पर तुम्हारी आँखों में देखा है, 
मैंने मेरी फिक्र, 
जो तुम करते हो हर वक़्त 
पर कहते नही कभी 
मुझसे न किसी और से। 
वक़्त से मुझे कुछ मिले ना मिले, 
पर मैंने खुद को पा लिया है, 
तुममें । 
यही मेरी प्रेरणा है, 
यही मेरी ताकत है ।

        -देवेंद्र प्रताप वर्मा 'विनीत'

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