Thursday, June 26, 2025

तुम्हारे जाने से

टूट गया मन का एक तारा

प्रिये, तुम्हारे जाने से।

जैसे किसी रात ने

अपने ही चाँद को खो दिया हो।


मैं अब भी गाता हूँ —

वही राग, वही धुनें,

पर हर स्वर के पीछे

तुम्हारी चुप्पी बैठी होती है।


गीत वही हैं,

जो तुमने सिखाए थे

मुस्कराकर, आँखों से —

पर अब

वे सिर्फ़ शब्द रह गए हैं

जिन्हें गा तो सकता हूँ

पर जी नहीं सकता।


तुम्हारे जाने के बाद

संगीत अधूरा नहीं हुआ —

बस

मेरा दिल

उसे पूरा मानने से इंकार करता है।


अब हर गाना

एक ख़ामोश चीख़ है,

हर तान

एक टूटा हुआ स्पर्श।


तुम थी तो सुर था,

अब सुर है —

पर तुम नहीं।

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