छुपा के ग़म मैं खुद को यूँ सजा के रखती हूँ
बस इस तरह से तुझसे दिल लगा के रखती हूँ
तुझे न छू सके ये अश्क, ये दुनिया की रुस्वाई
तभी तो खुद से भी तुझको बचा के रखती हूँ
ज़माना लाख चाहेगा कि हम राहें बदल डालें
मगर मैं अक्स तेरा दिल में बसा के रखती हूँ
कभी ख़्वाबों में मिलना और कभी नज़रों से बात करना
मैं अपनी बंदगी तुझमें समा के रखती हूँ
कठिन है राह लेकिन हौसला ये कम नहीं होता
तुझे पाऊँगी, ये उम्मीद जगा के रखती हूँ
न शोर-ओ-गुल, न वादे, न कोई रस्म दुनिया की
मैं चुपके से तुझे अपना बना के रखती हूँ