एक कड़वी हकीकत लिखी जाएगी
जब मेरी कहानी सुनी जाएगी।
अश्रुमय वेदना में ढली जाएगी
गीत पीड़ा के क्रंदन कली गाएगी
बाग ने सींच कर रूप यौवन दिया
बाग के ही द्वारा छली जाएगी।
संग भ्रमर का मिला पर नियति का नही
हिय से छूटकर किस गली जाएगी।
करती शिकवा नही बाग से कुछ कभी
मन के भीतर ही भीतर जली जाएगी।
ईश करते नहीं गलतियां आस थी
टूटा विश्वास कैसे खिली जाएगी।
श्वांस में प्राण भर मुस्कुराती हुई
बांटती फिर भी खुशी जाएगी।
हे विधाता रचो न ऐसी तकदीर कोई
विनती करती जहां से चली जायेगी।