Tuesday, April 23, 2019

तुमको दूर न जाने दूँगी

छोड़ गए तुम हमको तन्हा
लेकिन इतना ध्यान रहे
पीड़ा को मुस्काने दूंगी
तुमको दूर न जाने दूंगी।

बीच भंवर में तुमने छोड़ा
हर बंधन हर नाता तोड़ा
मधुमय जीवन की आशा को
ग्रहण लगा इस अभिलाषा को
यही भाग्य है यही नियति है
खुद को न समझाने दूंगी
तुमको दूर न जाने दूंगी।

मेरा मुझमें जो कुछ था
वह तुझको अर्पण कर आई
तुझमे खोकर तेरी होकर
मुस्कानों की राह बनाई।

उन राहों पर न जाने की
बंदिश नही लगाने दूंगी
तुमको दूर न जाने दूंगी।

तुम प्रेम के गहरे सागर
मैं नदिया की चंचल धारा
मधुर प्रेम के रंग मंच पर
वरमाला ने हमें पुकारा
हाय हमारी वरमाला के
पुष्प नही मुरझाने दूंगी
तुमको दूर न जाने दूंगी।

No comments:

Post a Comment

पीड़ा तू आनंद हो गई

खुशियों के बक्से से सारे रत्न-जवाहर लूट गए, मुस्कानों के मोती नयन से झर-झर करके छूट गए। सुख के पौधे रोपे जब और आँखों का नीर दिया, भँवरे रूठे...