लिखने से
कम नही होती है
मेरी पीड़ा
फिर भी लिखती हूँ
शब्दों में बांध कर रख देती हूँ
पन्नों के बीच हिफाजत से।
तू खुदा है इसका मुझे ऐतबार है , तेरी बनाई हर शै से मुझको प्यार है, तू लाख ज़ख्म दे मुझे मार ही डाले न क्यों मैं ज़िन्दगी हूँ मौत से ग़म से कभी हारूंगी न।
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पीड़ा तू आनंद हो गई
खुशियों के बक्से से सारे रत्न-जवाहर लूट गए, मुस्कानों के मोती नयन से झर-झर करके छूट गए। सुख के पौधे रोपे जब और आँखों का नीर दिया, भँवरे रूठे...
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यद्यपि तुम जा चुकी हो इस दुनिया से, फिर भी हर शब्द तुम्हारा एहसास कराता है। तुम्हारी हँसी, तुम्हारा मौन, हर पंक्ति में सजीव हो उठता है। जब प...
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ओ मेरी रानी तेरी कहानी तुझको सुनाऊंगा बातें बनाऊँगा आना तू फिर से आना तू फिर से भइया मै तेरा कन्हैया मै तेरा नाचूंगा गाऊंगा बंशी ...
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यदि तुम मुझको जान सके हो इतना साथ निभा देना मेरे होने का आशय दुनिया को समझा देना मैं सक्षम पर वक़्त नही था जो सम्मुख वह सत्य नही था अंत...
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